July 5, 2026

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ट्रेकिंग रूट की पुरानी ‘छानियों’ का कायाकल्प; पर्यटन की नई योजना या पलायन रोकने की आखिरी कोशिश?

Insights

📍 LOCATION: Trekking Routes | 🏷️ SUBJECT: Rural Tourism & Employment | 📌 STATUS: Under Review

देहरादून: उत्तराखंड के दुर्गम ट्रेकिंग रास्तों पर उपेक्षित हो चुकी पारंपरिक ‘छानियों’ (पशुपालकों के अस्थायी घर) को अब ‘इको-हट्स’ में बदलने की तैयारी है। सरकार का दावा है कि इससे ट्रेकर्स को सुविधा मिलेगी और गांव के लड़कों को घर पर ही काम मिलेगा। लेकिन पहाड़ की चढ़ाई जितनी कठिन है, उतनी ही मुश्किल इन कागजी योजनाओं का ज़मीन पर उतरना भी है।

योजना का हाल:

  • विरासत बनाम आधुनिकता: पिंडारी और कफनी जैसे रास्तों पर जो छानियां सालों से उपेक्षित हैं, उन्हें स्थानीय पत्थर और लकड़ी से दोबारा खड़ा किया जाएगा।
  • उम्मीद की किरण: मकसद है कि जो युवा बाहरी शहरों में छोटी नौकरियों के लिए धक्के खा रहे हैं, वे अपने ही इलाके में होमस्टे और गाइड बनकर सम्मान से कमा सकें।
  • असली चुनौती: ऊंचाई वाले इन इलाकों में ईंट-पत्थर तो मिल जाएंगे, पर पानी, बिजली और कूड़ा निस्तारण (Waste Management) का क्या? बिना ठोस तैयारी के ये हट्स भी कहीं खंडहर न बन जाएँ।

PahadFiles Insight:
यह योजना ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय रोजगार के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बन सकती है। हालांकि, पहाड़ी क्षेत्रों में पहले भी कई योजनाएँ क्रियान्वयन की चुनौतियों से जूझती रही हैं। स्थानीय भागीदारी, पारदर्शिता और दीर्घकालिक रखरखाव इस पहल की सफलता तय करेंगे।

Source: Government Inputs / Public Reports

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Updated: May 15, 2026